लघुकथाः भूलती यादें

लघुकथाः भूलती यादें

  • रोहिणी भारती

मोहन जल्दी आओ । तुम हमेशा लेट हो जाते हो एनीवर्सरी भी भूल जाते हो । एक मैं ही हूं इस घर पर जो हर किसी की चीज याद रखते हूं । मोहन सीढिये उतरते हुए बोले। ठीक है बाबा, तुम्हें सब कुछ याद रहता है। अब चलोगी या यहीं रहना है। हमेशा की तरह भावना का शोर मचाना । मोहन और भावना लॉंग ड्राइव के लिए निकल गए । पूरे रास्ते भावना की बाते खत्म नहीं हुई । लाँग ड्राइव से कब घर पहुंच गए पता ही नहीं लगा । मोहन बीते समय में पहुंच गया जब कॉलेज में उसको मुलाकात भावना से हुई उसके हंसमुख स्वभाव ने उसे अपनी और आकर्षित कर दिया था । नौकरी मिलने के बाद उसने भावना से शादी कर ली कहां चले गए जनाब । भावना ने उसे झकझोरा अंदर नहीं जाना आज गाडी में सेाना है। यह कहकर भावना अंदर चली गई। मोहन भी गाडी बंद करके अंदर आ गया । मोहन ने कहा भावना तुम सो जाओ मैं थोडी देर टीवी देखुंगा । टीवी पर न्यूज देखते दृदेखते कब नींद आ गई पता ही नहीं चला । सुबह बर्तन की आवाज से मोहन की नींद खुली । देखा तो भावना चाय का लेकर पास में खडी थी । भावना की मुस्कुराहट देखकर उसमें खो गया ।

आज यहीं सेाने का मूड बना लिया है। बस ऐसे ही न्यूज देखते-देखते नींद आ गई पता नहंी लगा । भावना और मोहन ने चाय पी मोहन अपने ऑफिस चला गया । भावना भी अपने काम में लग गई। जब काम में फ्री हुई तो शादी की एलबम लेकर बैठ गई । फोटो देखते-देखते उसे ध्यान आया । आज हमारी शादी को सात साल हो गए, लेकिन मोहन ने कभी एहसास नहीं होने दिया कि मै मॉं नहीं बन पाई । लेकिन भावना को हमेशा यही एहसास होता रहता कि उसके कारण मोहन बाप नहीं बन पाया । लेकिन भावना ने कभी मोहन को एहसास नहीं होने दिया उसी के कारण वो हमेशा दुखी रहती । तभी दरवाजे पर घंटी बजी टाइम देखा तो शाम के सात बज रहे थे । दरवाजा खोला तो सामने मोहन के हाथ में भावना के लिए एनवर्सरी का तोहफा था । यह देखकर भावना ने कहा अच्छा जनाव को याद था मैने तो सोचा था भूल गए होंगे । याद करने का जिम्मा सिर्फ तुम्हारा है क्या । मुझे भी याद रहता है । भावना ने सब कुछ मोहन की पसंद का बनाया हुआ था । खाना खाते और बातें करते टाइम का पता ही नहीं चला ।
घडी की आवाज से मोहन की नींद खुली देखा तो सूरज की रोशनी अंदर तक आ रही थी । टाइम देखा तो नौ बज रहे थे । यह क्या आज भावना नहीं जागी उसने देखा वो बेसुद सेा रही थी शायद थक गई होगी । आज चाय बनाता हूं फिर भावना को जगाऊंगा । चाय बनाकर जैसे ही उसने भावना को जगाया वो नहीं जागी तो मोहन डर गया । मोहन ने दुबारा आवाज मारी मोहन की जोर से आवाज मारने पर भावना बोली चीख क्यों रहे हो । आज हमारी शादी हुई है और तुम आज से ही मुझे चीख रहे हो । मोहन कहता है शादी और आज । मोहन को सोच आई लग रहा है भावना खाना बना रही है। ठीक है बाबा आगे नहीं बोलूंगा । बातें करते करते चाय पी । तभी भावना बाती अब तुम नीचे जाओ सारे लोग नीचे बैठे हैं। मोहन को कुछ समझ नही आया भावना क्या बोल रही है।

मोहन सोचने लगा आज भावना मजाक के मूड मे हैं । अभी ठीक हो जाएगी । मोहन नीचे जाकर नयूज पेपर लेकर बैठ गया । तभी घंटा हआ तो भावना नीचे आई । मोहन उसे देखता रह गया। उसने शादी का जोड़ा पहना हुआ था । मोहन भावना को देखता रह गया । तभी भावना बोली वह क्या हमारे सारे कहां गए । सारे कौन अब मजाक छोडो भावना ।

भावना बोली कौन सा मजाक क्या कल हमारी शादी नहीं हुई । मोहन बोला कल हमारी शादी को सात साल हो गए हैं। प्लीज मोहन मजाक मत करो । अब मोहन को थोडी सी चिंता होने लगी । मोहन ने भावना से महीना पूछा, साल पूछा उसेने सात साल पहले वाला बताया । मोहन अभी भी इसी में था कि यह मजाक कर रही है । तभी भावना नीचे गिर गई । मोहन ने जल्दी से भावना को उठाया और डॉक्टर के पास ले गया । होश में आते ही भावना कहने लगी । हमारी शादी होने में हफ्ता रह गया है और तुम मुझे यहाले आए हो । यह सुनकर मोहन बडी हैरानी से भावना को देखने लगा । डॉक्टर ने जब पूछा तो उसने सब कुछ बताया तो डॉक्टर ने सारे टेस्ट किए । फिर उन्होंने मोहन को बुलाया और उसे जो सुनाया यह सुनकर मोहन के पैरों तले जमीन खिसक गई । डॉक्टर ने बताया भावना को अल्जाइमर रेाग हो गया है । यह आहिस्ता-आहिस्ता और बढेगा । भावना को हॉस्पिटल में आए हुए दो साल हो गए थे और भावना सब कुछ भूल गई थी । हमारी शादी का सफर उसने बहुत पीछे छोड दिया था । अब मोहन एक था दोस्त भावना का ।

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